{"product_id":"manus-tan-rita-shukla","title":"Manus Tan-Rita Shukla","description":"\u003ch2\u003e\u003cstrong\u003eManus Tan-Rita Shukla\u003c\/strong\u003e\u003c\/h2\u003e\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eAbout the Products:\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअंतर्ग्लानि अकेली मेरी नहीं, दाह उनके कलेजे में भी है। दूसरी कोई संतान नहीं, अकेला मैं...और मैं भी तो...लेकिन सुवर्णा, मेरी समझ से नियति अपने क्रियाकलापों में कोई भी हस्तक्षेप बरदाश्त नहीं कर सकती...। तुम लोग अपने एकाकीपन का भार मुझे इसी तरह उठा लेने दो...बड़े सौभाग्य से मानव-जन्म की मर्यादा का निर्वाह मुझे इसी रूप में करना है। हाँ, कभी उस ईश्वर से अपने इस भाई के लिए कोई प्रार्थना करनी हो तो यही करना कि अगले जन्म में वह...\n\nदिनाजपुरवालों की इतनी औकात नहीं है कि वे अपनी बेटी के लिए अच्छा घर, सुरूप वर जुटा सकें—इसीलिए वे हमारी दया-दृष्टि की लालसा लिये बैठे हैं।...उस लड़की की आँखों में मेरे लिए हिकारत होगी या करुणा—और ये दोनों ही परिस्थितियाँ मेरी जिंदगी को हर तरह से दयनीय बनाकर छोड़ेंगी...नहीं, हम तुम्हारी यह बात कभी नहीं मान सकते...कभी नहीं...! तुम्हें किस बात की चिंता है, अम्मा, बाबूजी नहीं रहे तो क्या, मैं तो हूँ। मेरे रहते तुम्हें कौन सा अभाव?...\n\nमैंने भी अपने भीतर एक सुरक्षा कवच ढूँढ़ लिया है, सुवर्णा...जब कभी मन बेहद अकेला अथवा संतप्त होता है, मैं अपने उसी एक क्षण के स्वर्ग की ओर वापस लौट जाता हूँ। तुम नहीं जानतीं—अनजाने ही मुझे जो निधि मिली है, उसे आत्मा की सात तहों में समेटकर मैं यह जीवन बड़ी आसानी से बिता लूँगा। यह बंधन ही क्या कम है? जीने के लिए अब किसी बाहरी बंधन की अपेक्षा नहीं?\n—इसी पुस्तक से\n\nप्रख्यात कथाकार ऋता शुक्ल की कहानियों में समाज का संत्रास आँखों देखी घटना के रूप में उभरता है। तभी तो उनकी कहानियाँ संस्मरण, रेखाचित्र और कहानी का मिला-जुला अनूठा आनंद प्रदान करती हैं। प्रस्तुत है उनकी हृदयस्पर्शी एवं मार्मिक कहानियों का संकलन ‘मानुस तन’।\n\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLanguage: \u003c\/strong\u003eHindi\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003ePage No: \u003c\/strong\u003e152\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLegal Disclaimer:\u003c\/strong\u003e Product images are for illustrative purposes only. Images\/packaging\/ labels may vary from time to time due to changes made by the manufacturer's manufacturing batch and location.\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":62789228462239,"sku":"9789386001740","price":21.34,"currency_code":"SGD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/1857\/6931\/files\/9789386001740.jpg?v=1778478009","url":"https:\/\/www.distacart.com\/en-sg\/products\/manus-tan-rita-shukla","provider":"Dista","version":"1.0","type":"link"}