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लेखक ने मनुष्य जीवन को पृथ्वी पर पूर्ण रूप से सार्थक बनाने हेतु ज्योतिष शास्त्र में उपलब्ध साधनों का सहारा लेते हुए पाठकगणों को यह बताने का प्रयास किया है कि ज्योतिषशास्त्र द्वारा किन-किन माध्यमों से मनुष्य के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास किया जा सकता है एवं सुखी जीवन हेतु पृथ्वी पर उपलब्ध साधनों का उपभोग किया जा सकता है। पुस्तक में साधारणतया 16 संस्कारों का वर्णन किया गया है तथा मुख्य रूप से गर्भाधान संस्कार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। पुत्र-प्राप्ति के उपायों का भी समावेश किया गया है; जैसे व्रतों, स्तोत्रों, दान आदि की महिमा का वर्णन भी किया गया है, जो अधिक रोचक है। विशेष रूप से अशुभ मुहूर्तों को भी दरशाया गया है, जिनसे बचना आवश्यक है। इस ग्रंथ की यह विशेषता है कि गर्भ में आने से पूर्व ही ज्योतिषशास्त्र में दिए गए मुहूर्त, जिसे 'गर्भाधान मुहूर्त' नाम से जाना जाता है, इसकी भी प्रशंसा की गई है एवं इसकी जानकारी अन्य 15 संस्कारों के साथ गर्भाधान संस्कार को विशेष महत्त्व देते हुए उसे यहाँ उल्लिखित किया गया है। • गर्भधारण के शुभ एवं अशुभ मुहूर्त • गर्भ की रक्षा के प्रभावी उपाय • फलदायी एवं शक्तिशाली व्रत, दान और स्तोत्र • सोलह संस्कारों के माध्यम से उत्तम संतान का निर्माण
Language: Hindi
Page No: 272
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