{"product_id":"kaaljayi-kavi-aur-unka-kavya-bihari-madhav-hada-edited-by","title":"Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Bihari - Madhav Hada \n(Edited By)","description":"\u003ch2\u003e\u003cstrong\u003eKaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Bihari - Madhav Hada \n(Edited by)\u003c\/strong\u003e\u003c\/h2\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eAbout The Product:\u003c\/b\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eगागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विशाल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है।\nबिहारी रीतिकाल के एक असाधारण काव्य-शिल्पी थे, जिन्हें बिहारीलाल या बिहारीदास के नाम से भी जाना जाता है। उनकी रचनाएँ अधिकतर शृंगारिक रचनाएँ हैं, जिनमें स्त्री-पुरुष के सांसारिक प्रेम का वर्णन है और नायक-नायिका खुलकर कामुक हैं। उनकी रचनाओं को पढ़ते हुए लगता है कि उनमें नायक कम और नायिकाएँ अधिक हैं। उन्होंने नायिका की अलग-अलग भावनाओं और शंृगार का बहुत बारीकी से और खुलकर वर्णन किया है। बिहारी की भक्ति और नीति विषयक रचनाएँ इतनी कम हैं कि उन्हें भक्त-कवि नहीं ठहराया जा सकता। वे स्वयं को संसार में डूबा मनुष्य मानते थे और कहीं-कहीं इसका वे गहरा पश्चाताप भी ज़ाहिर करते हैं।\nबिहारी की सबसे प्रसिद्ध रचना ‘सतसई’ हैं जिसमें ब्रजभाषा में लिखे 713 दोहे हैं, जिनमें प्रेम, दैनिक जीवन और भक्ति का मिश्रण है। बिहारी के दोहे मुक्तक के नाम से जाने जाते हैं, जिनमें वे कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाते हैं। पुस्तक में बिहारी की संपूर्ण ‘सतसई’ संकलित है।\nइस पुस्तक का चयन व संपादन माधव हाड़ा ने किया है, जिनकी ख्याति भक्तिकाल के मर्मज्ञ के रूप में है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष माधव हाड़ा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फ़ैलो रहे हैं। संप्रति, वे साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की साधारण सभा और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य हैं। \u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cb\u003eProduct Details:\u003c\/b\u003e\u003c\/p\u003e\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eAuthor: \u003c\/strong\u003eMadhav Hada \n(Edited by)\u003c\/li\u003e\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eLanguage: \u003c\/strong\u003eHindi\u003c\/li\u003e\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003eNo. of Pages: \u003c\/strong\u003e120\u003c\/li\u003e\u003cli\u003e\n\u003cstrong\u003ePublication Date: \u003c\/strong\u003e2026\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eLegal Disclaimer: \u003c\/strong\u003eProduct color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.\u003c\/p\u003e\n\u003c\/li\u003e","brand":"Rajpal \u0026 Sons","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":62822200967327,"sku":"9789349162426","price":12.12,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/1857\/6931\/files\/9789349162426_front.jpg?v=1783666824","url":"https:\/\/www.distacart.com\/products\/kaaljayi-kavi-aur-unka-kavya-bihari-madhav-hada-edited-by","provider":"Dista","version":"1.0","type":"link"}