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श्रीरामचंद्रजी के द्वारा धर्म-स्थापन के कार्य में सभी पात्रों ने अपने तन, मन व धनपूर्वक सहायता की। श्रीरामचंद्रजी ने सर्वशक्तिमान श्रीहरि होते हुए भी संपूर्ण मानव समाज को सतत संघर्षशील एवं कर्मशील बनाए रखने के लिए कभी अपने मनुष्य रूप को ओझल नहीं होने दिया; रामराज्य की स्थापना में गिलहरी से लेकर महाबली हनुमान, गुरु वसिष्ठ, महाज्ञानी विश्वामित्र एवं अगस्त्य मुनि, से लेकर प्रकृति तक सभी ने अपने-अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। केवट, निषादराज, शबरी, महाराज जटायु, जांबवंत और सुषेण वैद्य सहित सभी से सहायता लेकर श्रीरामजी ने राष्ट्रकार्य में सबको स्वयं से बड़ा बना दिया, लेकिन सभी ने स्वयं को श्रीराम का सेवक ही माना है। संपूर्ण जगत् में वन में रहनेवाले सभी वानर-भालू के समाज को महाराज सुग्रीव के नेतृत्व में संगठित करके उन सबमें देवशक्ति का संचार किया, जिससे अक्षकुमार, मेघनाद, अतिकाय तथा पाताल निवासी महिरावण से लेकर कुंभकर्ण जैसे महाशक्तिशाली को मुक्ति दिलाई। रामायण के इन एक सौ आठ पात्रों के पावन चरित्र की यह पवित्र कहानी बड़ी ही उदाहरण एवं पूरे मानव समाज के लिए प्रेरक है। जब तक इस पृथ्वी पर मानव की सृष्ट रहेगी, तब तक रामायण के पात्रों की कथा-कहानी स्वयं की माता की तरह हमारा पालन करते हुए हमें जन्मों-जन्मों तक प्रेरणा देती रहेंगी।
Language: Hindi
Page No: 460
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