Aur Bakula Gir Gaya
दो समझदार युवा एक छोटे से शहर में एक साथ बड़े होते हैं। उनके घर के पिछवाड़े में लगा बकुला का पेड़ उनके उभरते प्यार का मूक गवाह है। श्रीकांत का एक छोटे से शहर के लड़के से अंतरराष्ट्रीय आई.टी. कंपनी के सी.ई.ओ. बनने तक का सफर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। उसकी पत्नी के रूप में श्रीमती अपनी सभी इच्छाओं का दमन कर चुपचाप उसका सहयोग करती रहती है। उसे इस बात का एहसास भी है कि श्रीकांत के साथ जीवन जीने में उसे इतिहास के प्रति अपने प्रेम को भूलना होगा।एक आदर्श दंपती दिखनेवाले इस जोड़े में जल्द ही छोटी-छोटी दरारें आने लगती हैं। किसी का भी ध्यान इसपर नहीं जाता; और एक दिन दोनों के बीच सारे रिश्ते खत्म हो जाते हैं। उनके पैतृक शहर में लगे बकुला के पेड़ ने असहाय बनकर उनके प्यार के प्रारंभ से लेकर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में खरा उतरते उनके प्यार को देखा है।सुधा मूर्ति इस कहानी को अपने ही अंदाज में बता रही हैं; जिसमें उन्होंने बकुला की मूक सुगंध का सहारा लिया है।
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Author:Sudha Murty
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Category:Indian Writing
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Publisher Name:Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
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Language:Hindi
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Page No.:175
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Publishing Date:01/01/2025
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