About The Product:
‘‘भगवंत अनमोल हिन्दी के उन युवा लेखकों में हैं जो अपने हर उपन्यास में अपने पिछले उपन्यास से आगे निकलने का प्रयास करते हैं। भाषा, कथानक, किरदार- हर बार उनके पास कुछ नया होता है। बावनी इमली उनकी रचनाशीलता का एक नया सशक्त मुकाम है, जिसमें 1857 की क्रांति में एक कस्बे के कुछ गुमनाम नायकों की कहानी कही गई है। इतिहास के बड़े नैरेटिव के समक्ष स्थानीय कथा, ग्लोबल के बरअक्स लोकल। निस्संदेह एक बड़े विज़न का इतिहास है, जो स्वयं इतिहास लेखन पर भी सवाल उठाने वाला है।’’ - प्रभात रंजन (लेखक, अनुवादक, माडरेटर ‘जानकीपुल’) ‘‘बावनी इमली एक ऐसी मिट्टी की पुकार है, जहाँ 52 क्रांतिकारियों को इमली के एक ही पेड़ के नीचे फाँसी दी गई थी। युवा लेखक भगवंत अनमोल ने इस उपन्यास के माध्यम से उस ऐतिहासिक घटना को जीवंत किया है और उन गुमनाम वीरों को सम्मान दिया है। यह उपन्यास केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि इतिहास और कल्पना का सुंदर संगम है जिसमें उन क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके प्रति सम्मान का एक जीवंत प्रयास है।’’ - पवन कुमार (साहित्यकार एवं आईएएस) युवा कथाकार भगवंत अनमोल का यह पाँचवाँ उपन्यास है। इससे पहले उनके ज़िन्दगी 50-50, प्रमेय, बाली उमर, और गेरबाज़ उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। इनके उपन्यास ज़िन्दगी 50-50 को 2017 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा ‘बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार’ और प्रमेय को 2022 में ‘साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
Product Details:
Legal Disclaimer: Product color may slightly vary due to photographic lighting sources or your monitor settings.