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‘‘हम मिडिल क्लास वालों को खाने-पीने का बड़ा शौक है। हम हर रंग का खाते-पीते हैं, हर प्रांत का और हर देश का भी। इससे पहले कि उत्तर भारत इडली-डोसा और सांभर के रंग में रंगता, और दक्षिण भारत छोले-भटूरे और बटर चिकन के, पूरा देश ही रंग गया चाइना के अनोखे खान-पान से। वैसे नाम भर के लिए यह चीन का है, लेकिन हमारे चाऊमीन, मोमोज़ और मंचूरियन तो ठेठ अपने ही हैं। जब तक अज़ीनोमोटो या सोया सॉस के साथ हम हरा धनिया नहीं मिलाते, हमें तो स्वाद ही नहीं आता। मंचूरियन सिर्फ़ एक घालमेल रेसिपी का नाम नहीं, हमारी पूरी पीढ़ी की सोच है। इसे साथ चाहिए, नूडल्स या चावलों का। यानी पूरी तरह मिडिल क्लास का मेटाफेर। जो हर नए को अपनाने को तैयार, अपने से आगे जाने वाले लोगों से जलने को तैयार, किसी भी किस्म के जुगाड़ से दोस्ती को तैयार लेकिन ज़रूरत के समय सब का साथ देने वाली मज़ेदार क्लास, मिडिल क्लास।’’ - पुस्तक की भूमिका से इसी मिडिल क्लास के इर्द-गिर्द विविध रंगों और स्वादों की कहानियाँ है मीडिल क्लास मंचूरियन। जयंती रंगनाथन तीन दशकों से मीडिया और लेखन में सक्रिय हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कार्य करने के बाद पिछले चौदह सालों से वे हिंदुस्तान अखबार में एक्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इनके सात उपन्यास, दो कहानी संग्रह प्रकाशित हैं। इसके अलावा वे ऑडियो बुक्स राइटर, फिल्म और टेलिविजन सीरियल राइटर और चर्चित पॉडकास्टर हैं।
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