किताब के बारे में: मैथिलीशरण गुप्त की रचना जयद्रथ वध महाभारत के युद्ध प्रसंग पर आधारित एक खंडकाव्य है जिसमें अर्जुन द्वारा अपने पुत्र अभिमन्यु की मृत्यु का प्रतिशोध लेने की कथा वर्णित है। यह काव्य वीर रस से ओतप्रोत है और धर्म प्रतिज्ञा न्याय तथा युद्धनीति की गूढ़ व्याख्या करता है। अर्जुन की प्रतिज्ञाकृजयद्रथ का वध न कर पाए तो आत्मदाह करेंगेकृकथा को उत्कर्ष पर पहुँचाती है। श्रीकृष्ण की कूटनीति सूर्यास्त से पहले लक्ष्य की प्राप्ति और अर्जुन का शौर्य इस काव्य को प्रेरणादायक बनाते हैं। यह रचना वीरता और नैतिक धर्म का उत्कृष्ट प्रतीक है।
Author: मैथिलीशरण गुप्त (Maithilisharan Gupt)
Pages: 106
Edition: 1835
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