किताब के बारे में: बिल्लेसुर बकरिहा सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला द्वारा लिखित एक हास्य.व्यंग्य कथा है जो ग्रामीण जीवन सामाजिक व्यवस्था और विवाह प्रणाली की विडंबनाओं पर तीखा कटाक्ष करती है बिल्लेसुर एक अशिक्षित आलसी और बकरे पालने वाला ग्रामीण युवक है जिसे अचानक शादी का प्रस्ताव मिलता है बिना योग्यता के भी वह विवाह कर लेता है जो भारतीय समाज में रिश्तों और विवाह की विसंगतियों को उजागर करता है निराला ने इस कथा में व्यंग्य और हास्य के माध्यम से यह दिखाया है कि समाज में योग्यता से अधिक चलन और चालाकी से काम बनते हैं।
Author: सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (Suryakant Tripathi Nirala)
Pages: 94
Edition: 1900
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