किताब के बारे में: निराला की महाभारत काव्य रूप में रचित एक गहन और दार्शनिक रचना है जो धर्म कर्म और आत्मसंघर्ष की भावनाओं को उजागर करती है उन्होंने पांडवों और कौरवों के माध्यम से युद्ध की त्रासदी न्याय की खोज और मानवीय कमजोरियों का चित्रण किया है अर्जुन का मानसिक द्वंद्व और कृष्ण का मार्गदर्शन इस रचना के केंद्रीय तत्व हैं निराला की भाषा प्रतीकात्मक भावनात्मक और गूढ़ है जो परंपरागत महाकाव्य को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ती है। यह कृति युद्ध से परे जाकर सत्य नीति और जीवन के मौलिक प्रश्नों पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है
Author: सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (Suryakant Tripathi Nirala)
Pages: 236
Edition: 1908
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