किताब के बारे में: एक साहित्यिक की डायरी गजानन माधव मुक्तिबोध का गहन आत्ममंथन और विचारपूर्ण निबंध-संग्रह है, जिसमें उन्होंने साहित्य, समाज, राजनीति और चेतना के जटिल संबंधों की पड़ताल की है। यह कृति किसी आम डायरी की तरह नहीं, बल्कि एक सजग लेखक की वैचारिक यात्रा का प्रतिबिंब है। मुक्तिबोध इसमें लेखक की सामाजिक ज़िम्मेदारी, आत्मसंघर्ष, रचनात्मक ईमानदारी और विचारधारात्मक प्रतिबद्धता पर गंभीर चिंतन करते हैं। उनके विचार मार्क्सवादी दृष्टिकोण से प्रेरित हैं, लेकिन मानवीय संवेदना से गहराई तक जुड़े हुए हैं। यह कृति हिंदी साहित्य की आलोचनात्मक चेतना को नई दिशा देने वाला एक महत्त्वपूर्ण बौद्धिक दस्तावेज़ है।
Author: जी. एम. मुक्तिबोध (G. M. Muktibodh)
Pages: 124
Edition: 1926
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