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बिहार राज्य का ऐतिहासिक अतीत अत्यंत ही प्राचीन एवं उतना ही गौरवशाली रहा है। विश्व पटल पर वैशाली के रूप में पहले गणतांत्रिक राज्य की स्थापना से लेकर चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल तक बिहार की समृद्धि का एक अलग ही इतिहास है। महात्मा बुद्ध, भगवान् महावीर एवं गुरु गोविंद सिंह की यह पावन भूमि है, आजादी के स्वतंत्रता-संग्राम के वीरों में खुदीराम बोस की यह धरती वीरों की गाथा के लिए पूजनीय है । स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेता महात्मा गांधी के लिए यह धरती साक्षात् देवी का रूप है। बिहार के वीर सपूत बिरसामुंडा, बाबू कुँवर सिंह की वीरगाथा यह भूमि गा रही है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. श्री कृष्ण सिंह, स्वामी सहजानंद सरस्वती से लेकर राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर एवं जयप्रकाश नारायण की यह धरती पूजनीय एवं वंदनीय है। आर्यभट्ट, चाणक्य एवं 'अष्टाध्यायी' पुस्तक के लेखक पाणिनी के गुरु भगवान् बोधायन ने बिहार की धरती से संपूर्ण विश्व में ज्ञान रूपी प्रकाशपुंज को फैलाने का काम किया है । बिहार की पावन भूमि पर जनमे कुल 8 हस्तियों की जीवनगाथा को इस पुस्तक में शामिल किया गया है, जो वर्तमान पीढ़ी, खासकर युवापीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएँगी। इन महान् हस्तियों की जीवनगाथा बिहार के नव-निर्माण में 'अतीत के साक्ष्य' के रूप में मार्ग प्रशस्त करेगी। ऐसे महान् कर्मयोगियों की जीवनगाथा एवं कर्म को कागज के पन्नों पर अंकित करने की महती आवश्यकता है।
Language: Hindi
Page No: 208
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