किताब के बारे में: अलका सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला द्वारा रचित एक सामाजिक आधारित उपन्यास है जो बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम सामाजिक कुरीतियों और नारी चेतना के इर्द गिर्द बुना गया है उपन्यास की नायिका अलका एक शिक्षित स्वाभिमानी और संवेदनशील महिला है जो पारंपरिक समाज की बंदिशों को तोड़कर आत्मनिर्णय और स्वतंत्रता का मार्ग चुनती है निराला ने इस रचना में स्त्री स्वतंत्रता जाति.पाँति की संकीर्णता और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध स्वर उठाया है। अलका न केवल एक प्रेमकथा है बल्कि यह स्त्री अस्मिता और सामाजिक चेतना का सशक्त दस्तावेज है जो आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी बना हुआ है
Author: सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (Suryakant Tripathi Nirala)
Pages: 222
Edition: 1800
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