किताब के बारे में: मैथिलीशरण गुप्त की काव्य रचना द्वापर द्वापर युग की सामाजिक धार्मिक और नैतिक स्थितियों का चित्रण करती है। इसमें धर्म अधर्म न्याय अन्याय और मानव मूल्यों के संघर्ष को दर्शाया गया है। काव्य के माध्यम से लेखक ने कृष्ण के माध्यम से नीति धर्म और कर्म के गूढ़ संदेश दिए हैं। पात्रों के माध्यम से मानवीय भावनाएं मोह ममता वासना और विवेक के द्वंद्व को उजागर किया गया है। द्वापर केवल पौराणिक आख्यान नहीं बल्कि समकालीन समाज के लिए भी एक नैतिक मार्गदर्शन है जो पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
Author: मैथिलीशरण गुप्त (Maithilisharan Gupt)
Pages: 164
Edition: 1900
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