Bharatiya Gyan Parampara : Avadharna
भारतीय ज्ञान-परंपरा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि सतत सृजनशील चेतना है। आधुनिक चिंतकों ने इसे स्थिर ज्ञान-संरचना मानने की बजाय एक जीवंत प्रक्रिया के रूप में देखा, जो समाज, राजनीति, संस्कृति और शिक्षा के नए आयामों को आत्मसात् करने में सक्षम है। इस पुनर्परिभाषा में परंपरा और आधुनिकता का द्वंद्व मिटाकर दोनों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया गया है। एक ओर यह व्यक्ति को आत्मानुभूति और नैतिकता की ओर उन्मुख करती है, तो वहीं दूसरी ओर समाज और राष्ट्र के सामूहिक उत्थान की राह भी सुझाती है।इस पुनर्निर्मित दृष्टि का सबसे महत्त्वपूर्ण पक्ष यह है कि ज्ञान को केवल बौद्धिक साधन न मानकर जीवन का सार और व्यावहारिक मार्गदर्शक माना गया। यह परंपरा अब केवल आध्यात्मिक उन्नति का साधन नहीं रही, बल्कि सामाजिक न्याय, मानवीय करुणा, शिक्षा, सेवा और वैश्विक भाईचारे जैसे मूल्य इसमें समाहित हो गए। आधुनिक काल के चिंतन से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय ज्ञान-परंपरा का भविष्य उसकी अनुकूलनशीलता में निहित है। वह हर युग में स्वयं को नया रूप देती है, इसलिए आज भी विश्व-मानवता के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।
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Author:Prof. Lalchand Ram
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Category:History
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Publisher Name:Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.
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Language:Hindi
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Page No.:192
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Publishing Date:01/01/2026
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