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मैं एक ऐसा रेशम का कीट थी, जिसने स्वयं को अपने ही बनाए रेशमी तारों में ऐसे जकड़ लिया था कि मरे बिना निस्तार संभव नहीं था। और देखा जाए तो मरना देह से साँसों का विलग होना ही तो नहीं होता, मन का मर जाना भी मरना ही होता है। बालों में नकली चोटी लगाकर चंपा के फूलों का गजरा, माथे पर अठन्नी भर बड़ी लाल बिंदी, होंठों पर सस्ती भड़कीली लिपस्टिक, चमकीली पीली साड़ी, हाथों में भर-भर काँच की चूड़ियों से सजी, लोगों के घरों में तालियाँ मार-मारकर बधाइयाँ गाती मैं नीमा कहाँ रह गई थी। मैं तो शारदा हूँ, हिजड़ा शारदा।
Language: Hindi
Page No: 184
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