Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Raskhaan - Madhav Hada - Dista
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Raskhaan - Madhav Hada
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Description

Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Raskhaan - Madhav Hada

About The Product:

गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विपुल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है। सैयद इब्राहिम रसखान (1533-1628 ई.) जन्म से तो मुसलमान थे, लेकिन उनकी सारी कविता आकंठ कृष्ण की भक्ति में डूबी हुई है। आश्चर्य यह है कि उनकी कविता में उनके मुसलमान होने का कोई संस्कार और चेतना नहीं है। रसखान उस समय हुए जब भारत में इस्लाम का आगमन हो चुका था और उसके मानने वाले यहाँ के शासक थे। रसखान का होना इस बात का सबूत है कि यह ऐसा समय था, जब दो धर्मों के बीच दीवारें और दूरियाँ नहीं बनी थीं। उनकी कविता की सबसे बड़ी ख़ासियत उसकी अनायास अनुप्रासिक वर्णयोजना और शब्द चयन है। उनकी कविता में इस कारण लय और सांगितिकता आ गई है। प्रस्तुत संचयन में की सुजान-रसखान की 256,प्रेमवाटिका की 53 और दानलीला की 11 रचनाएँ सम्मिलित हैं। रसखान के यहाँ-वहाँ मिलने वाले पाँच स्फुट पद भी यहाँ दिए गए हैं। यहाँ संकलित रचनाओं के संचयन में उपलब्ध सभी संचयनों से सहयोग लिया गया। रचनाओं के पारंपरिक वर्गीकरण को यहाँ यथावत् रहने दिया गया है। इस पुस्तक का चयन व संपादन माधव हाड़ा ने किया है, जिनकी ख्याति भक्तिकाल के मर्मज्ञ के रूप में है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष माधव हाड़ा भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में फ़ैलो रहे हैं। संप्रति, वे साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की साधारण सभा और हिन्दी परामर्श मंडल के सदस्य हैं।

Product Details:

  • Author: Madhav Hada
  • Language: Hindi
  • No. of Pages: 112
  • Publication Date: 2025
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