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About The Product:
किनाया लोकप्रिय लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ का आठवाँ उपन्यास है। इससे पहले इनके सात उपन्यास - शिगाफ़, शालभंजिका, पंचकन्या, स्वप्नपाश, मल्लिका, सोफ़िया और मातृसत्ता पर केंद्रित उपन्यास त्रिमाया आ चुके हैं। साथ ही दस कथा-संकलन प्रकाशित हैं। कथेतर में दो यात्रा वृत्तांत होना अतिथि कैलाश का, घुमक्कड़ी अंग्रेज़ी साहित्य के गलियारों और रज़ा फ़ाउंडेशन फ़ैलोशिप के तहत बिरजू लय नृत्यकला पर पुस्तक आ चुकी है। इन्हें केके बिड़ला फ़ाउंडेशन, राजस्थान साहित्य अकादमी के रांगेय राघव सम्मान, गीतांजलि इण्डो-फ्रेंच लिटरेरी प्राईज़ ज्यूरी अवार्ड, वनमाली कथासम्मान, ढ़ींगरा फ़ाउंडेशन अंतर्राष्ट्रीय कथा सम्मान, इंदु शर्मा कथा सम्मान, स्पंदन सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय वातायन यू के सम्मान जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों व पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इन्हें रज़ा फ़ैलोशिप के अलावा कृष्ण बलदेव वैद फ़ैलोशिप और संस्कृति मंत्रालय की सीनियर फ़ैलोशिप भी मिल चुकी है। इनके शालभंजिका उपन्यास का डच में अनुवाद तथा कई कहानियों का अंग्रेज़ी और रूसी सहित कुछ भारतीय भाषाओं में भी अनुवाद हो चुका है। मनीषा नेशनल फ़िल्म अवार्ड 2019 और इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल गोआ 2021 की ज्यूरी सदस्य भी रही हैं। आजकल जयपुर में रहती हैं और रचनात्मक लेखन पर एक वार्षिक आयोजन ‘कथाकहन’ करती हैं। मनीषा कुलश्रेष्ठ लोकप्रिय कथाकार तो हैं ही, पर्यावरण चिंतक भी हैं। वे राजस्थान में जन्मी हैं मगर वरिष्ठ वायुसेना अधिकारी की पत्नी होने के नाते पूरा देश उनका घर रहा है।
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