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About the Products:
तहजीब के शहर लखनऊ में बसा कुलदीप माथुर राह चलते दुश्मनी मोल लेने की कला का उस्ताद था। पैसे को खुदा और इनसानों को कीड़े समझने की फितरत रखने वाला कुलदीप अपनी शादी की सालगिरह की रात में दिल्ली के लिए निकला, लेकिन अपनी मंजिल पर कभी न पहुँचा। कोहरे से ढकी उसकी कार अगली सुबह गोमती पुल पर लावारिस हालत में बरामद हुई। दुनिया सिर पटककर रह गई, लेकिन किसी को भनक तक न लगी कि कुलदीप माथुर को जमीन खा गई या आसमान निगल गया। पुलिस के आला अधिकारियों का पुख्ता खयाल था कि अपनी पैंतरेबाजियों के अंजाम से घबराकर उसने गोमती की तलहटी में परमानेंट पनाह तलाश ली थी। उसके शुभचिंतकों का मानना था कि वह अपने दुश्मनों के हत्थे चढ़ गया था, जबकि उसके दुश्मन यह सोचकर कलपे हुए थे कि उनका करोड़ों का देनदार कुलदीप अपने हाथ झाड़कर हवा में धुएँ की तरह गायब हो गया था ! ऐसे में जब कुलदीप माथुर की बीवी की जिंदगी में अतीत से उभरे एक पुराने शख्स ने कदम रखा तो शहर भर में इस स्कैंडल से खलबली मचना स्वाभाविक था। गौरव कुमार निगम की लेखनी से निकला आखिरी पन्नों तक रहस्य पर परदे गिराए" पुलिस, पैसे, परिवार, प्रतिद्वंद्विता और प्रतिघात की गुत्थियों में उलझा एक तेज रफ्तार, सस्पेंस थ्रिलर उपन्यास ।
Language: Hindi
Page No: 216
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