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About the Products:
इस पुस्तक के लेखक श्री लालजी टंडन राजनीतिक क्षितिज के एक चमकते नक्षत्र रहे। चाहे देश का शीर्ष नेतृत्व हो, महापुरुष हों, साहित्यकार हों, समाजसेवी हों, नौकरशाह हों या समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़ा स्वच्छकार हो, सभी को करीब से जानने-समझने के मौके लेखक के सामने आए। मामूली व्यक्ति से लेकर सम्मानित महान् हस्तियों से किसी-न-किसी रूप में उनके संपर्क बनते रहे। इस पुस्तक में ऐसे लोगों पर अनेक संस्मरण हैं, जिनके ऊपर अगणित ग्रंथ लिखे गए हैं। फिर भी इस मूर्धन्य विभूति के वे पक्ष, जो न किसी ग्रंथ में हैं, न किसी को मालूम हैं, जो अब तक अनकहे हैं, लेखक उनका प्रत्यक्षदर्शी रहा है। या किसी विश्वस्त के द्वारा ज्ञात हुए हैं। इन संस्मरणों को यदि हमारी युवा पीढ़ी पढ़ेगी, तो उसे पता चलेगा कि आज से 60-70 साल पहले की हमारी राजनीति का चरित्र कितना ऊँचा और कितना त्यागमय था। इसमें अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक व्यक्तियों और घटनाओं की भी चर्चा है, जिनसे अपने राजनीतिक जीवन में टंडनजी जुड़े रहे हैं। उसमें गैर-कांग्रेसवाद की शुरुआत हो या चौक में कवि सम्मेलन की परंपरा का आरंभ, महान् साहित्यकार अमृतलाल नागरजी से निकटता हो, लखनऊ के मशहूर कॉफी हाउस में उनकी उपस्थिति, वहाँ आने-जाने वाले पत्रकारों, साहित्यकारों अथवा राजनेताओं के संस्मरण पुस्तक में संकलित हैं।
Language: Hindi
Page No: 200
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