Description:
भारत का इतिहास अक्सर आक्रमणों की एक श्रृंखला के रूप में लिखा जाता है, जो आर्यों के उपमहाद्वीप के द्वार पर दस्तक देने से शुरू होता है। उसके बाद मध्य एशियाई जनजातियों, अरब, अफगान, तुर्क और अंत में यूरोपीय लोगों के आने का जिक्र आता है। मुख्यधारा का इतिहास भारत को एक बंजर भूमि के रूप में चित्रित करता है जहां विभिन्न नस्लें और संस्कृतियां अलग-अलग समय पर पहुंचीं। हमें बताया जाता है कि यह देश इन सभी प्रवासियों और आक्रमणकारियों का है या किसी का नहीं। प्रख्यात गल्पकार: भारतीय इतिहास से खिलवाड़ की घटनाएं और उनकी प्रमाणिक सच्चाई; इस इतिहासलेखन को चुनौती देती है। यह भारत के इतिहास को उसके अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह आर्य आक्रमण सिद्धांत को खारिज करती है और वैदिक तथा हड़प्पा सभ्यताओं को एक ही सिक्के के दो पहलू बताती है। यह अशोक की विरासत का पुनर्मूल्यांकन करती है और नेहरू की उनकी (अशोक की) महानता के प्रति जुनून पर सवाल उठाती है। यह भारत के स्वर्ण युग कहे जाने वाले गुप्त काल की पुनर्व्याख्या करती है और उत्तर-गुप्त काल पर नई रोशनी डालती है। इस किताब का मजबूत तर्क है कि भारत में इस्लामी विजय को जरबदस्त हिंदू प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से तब तक, जब तक कि अकबर ने कूटनीतिक/वैवाहिक प्रस्ताव नहीं दिए। जब औरंगजेब ने टकराव की नीति अपनाई, तो उसका साम्राज्य ढह गया। पारंपरिक इतिहास की समझ के विपरीत, प्रख्यात गल्पकार; बताती है कि अंग्रेजों ने भारत को मुगलों से नहीं, बल्कि मराठों से हासिल किया। यह किताब भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी, गांधीवादियों और क्रांतिकारियों की भूमिका का भी परीक्षण करती है कि उन्होंने उपनिवेशवाद को कैसे समाप्त किया। यह पुस्तक दिल्ली-केंद्रित इतिहास दृष्टि से बचती है और करकोटा, गुर्जर-प्रतिहार, पल्लव और अहोम जैसे महत्वपूर्ण राजवंशों पर रोशनी डालती है।
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