किताब के बारे में: गीतिका सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का एक उत्कृष्ट काव्य.संग्रह है जिसमें उन्होंने गीतात्मक शैली में गहरी संवेदनाओं आत्मचिंतन सामाजिक विडंबनाओं और मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त किया है इस संग्रह की कविताएं लयात्मक होते हुए भी गंभीर विषयों पर आधारित हैं जो निराला की वैचारिक गहराई और काव्य कौशल को दर्शाती हैं गीतिका में प्रेम प्रकृति करुणा और विद्रोह सबका सुंदर संतुलन मिलता है निराला की भाषा सरल होते हुए भी प्रभावशाली है जो पाठक के हृदय को स्पर्श करती है यह संग्रह छायावाद की कोमलता और यथार्थवाद की प्रखरता का संगम है जो हिंदी कविता को नई दिशा प्रदान करता है
Author: सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला (Suryakant Tripathi Nirala)
Pages: 164
Edition: 1905
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