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सेना हमारे देश का सबसे ज्यादा अनुशासित तंत्र है। यहाँ हर रणनीति मैदान पर उतारने से पहले कागज पर उतारी जाती है। हर छोटी-बड़ी बात को कलमबद्ध किया जाता है। इतनी व्यवस्थित संस्था में भी महिलाओं के योगदान का दस्तावेजीकरण नहीं किया गया। इस बात से समझा जा सकता है कि यहाँ भी महिलाओं के योगदान को अनदेखा कर दिया गया। असल में सेना ऐसा संस्थान है, जहाँ एक व्यक्ति की आय में दो लोग काम करते हैं और वह भी सातों दिन, चौबीसों घंटे ! कैंटोनमेंट का जीवन सिविलियन परिवेश से बिल्कुल अलहदा जीवन है। यह सच है कि सेना समूचे देश की नुमाइंदगी करती है। यह भी सच है कि सैनिक और उसकी पत्नी मूलतः देश के आम नागरिक ही होते हैं, जिन्हें सेना की भाषा में सिविलियन कहा जाता है। वही सिविलियन जब सैनिक जीवन को अपना लेते हैं, तब उनके सोचने, व्यवहार करने और जीने का तरीका बदल जाता है। सैनिक पत्नियाँ हर दो वर्ष बाद खुद को बार-बार दूसरों की कसौटी पर खरा उतरने का दबाव भी झेलती हैं। इसके साथ यदि वे अपना कॅरियर बनाने की चाह रखती हैं, उस स्थिति में उनके पास अंतहीन संघर्षों की कड़ियाँ जुड़ती चली जाती हैं। इन सबके बावजूद इस समाज में एक बहुत लोकप्रिय कथन साधिकार फैला हुआ है- हालात चाहे जितने खराब हों, हमें एन्जॉय करना आता है, क्योंकि हम फौजी हैं।
Language: Hindi
Page No: 216
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