किताब के बारे में: श्री चन्द्रावली नाटिका भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा रचित एक प्रसिद्ध भावनात्मक नाटक है जिसमें शृंगार रस की प्रधानता है यह नाटक राधा कृष्ण और चन्द्रावली के त्रिकोणीय प्रेम पर आधारित है जिसमें चन्द्रावली की विरह वेदना और कृष्ण के प्रति उसकी प्रेमभावना को मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया गया है भारतेन्दु जी ने इसे ब्रजभाषा में अत्यंत मधुर संगीतात्मक और काव्यमयी शैली में लिखा है यह नाटक केवल प्रेम नहीं बल्कि नारी मन की गहराई ईर्ष्या समर्पण और करुणा का सुंदर चित्रण करता है श्री चन्द्रावली हिंदी रंगमंच और भक्ति साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।
Author: भारतेन्दु हरिश्चंद्र (Bharatendu Harishchandra)
Pages: 121
Edition: 1900
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